शनिवार, 24 सितंबर 2011

=भूल करने में पाप तो है ही, परन्तु उसे छिपाने में उससे भी बड़ा पाप है। -महात्मा गांधी

=अपनी भूल अपने ही हाथों से सुधर जाए तो यह इससे कहीं अच्छा है कि कोई दूसरा उसे सुधारे। - प्रेमचन्द

=गलती तो हर मनुष्य कर सकता है, किन्तु उस पर दृढ़ केवल मूर्ख ही होते हैं। -सिरसो

=अंधा वह नहीं जिसकी आँख फूट गई है, अंधा वह जो अपने दोष ढंकता है। -महात्मा गांधी

=जो जीना नहीं जानता है वह मरना कैसे जाने ? -महात्मा गांधी

=नम्रता का ढोंग नहीं चलता, न सादगी का। -महात्मा गांधी

=व्यक्ति दौलत से नहीं, ज्ञान से अमीर होता है।

=झूठ इन्सान को अंदर से खोखला बना देता है।

=संसार में सब से दयनीय कौन है? धनवान होकर भी जो कंजूस है। -विद्यापति

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें