श्री सीरवी सेवा मंण्डल विल्लिवाकम चेन्नई में एक समाज सेवक हू मेरा धर्म समाज सेवा करना हे
में माँ अम्बे का भगत हू में हमेसा उसके चरणों में दास बनकर रहूँगा जय माँ अम्बे जय माँ दुर्गे हमारे धर्मगुरु दीवन श्री माधवसिंगजी को प्रणाम करता हू
सोमवार, 26 सितंबर 2011
फल वाला बेच रहा था अंगूर
चिल्ला रहा था आलू
मैं उससे भी जोर से चिल्लाया
बेचता है फल, चिल्लाता आलू
गिड़गिड़ाने लगा फल वाला
वो जी घोटाले में नहीं था जी
मक्खियों को दे रहा हूं चकमा
हिंदी समझ लेती हैं न वे भी।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें