मुझसे जुड़ने वाले हर व्यक्ति को बता दूँ कि मैं किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई सरोकार नहीं रखता.... खिलाफत कर सकता हूँ, समर्थन नहीं करता.... मेरे जीवन का एकमात्र उद्देश्य माँ भारती की सेवा करना है.... लोगो को जागृत करके, बुराई का विरोध करके.... मैं उन सभी विचारों, नीतियों और लोगों का विरोध करता हूँ जिन पर आदर्शवाद और नैतिकता धिक्कारते हैं.... मेरा ध्येय है- "राष्ट्र सर्वप्रथम सर्वोपरि"..... जय हिंद.....जय माँ भारती.....
सोमवार, 29 अगस्त 2011
मुझसे जुड़ने वाले हर व्यक्ति को बता दूँ कि मैं किसी भी राजनीतिक पार्टी से कोई सरोकार नहीं रखता.... खिलाफत कर सकता हूँ, समर्थन नहीं करता.... मेरे जीवन का एकमात्र उद्देश्य माँ भारती की सेवा करना है.... लोगो को जागृत करके, बुराई का विरोध करके.... मैं उन सभी विचारों, नीतियों और लोगों का विरोध करता हूँ जिन पर आदर्शवाद और नैतिकता धिक्कारते हैं.... मेरा ध्येय है- "राष्ट्र सर्वप्रथम सर्वोपरि"..... जय हिंद.....जय माँ भारती.....
चेतन हैं
पर जड़ जैसे दिखते हैं,
कलम उनके हाथ में
पर दूसरे के शब्द लिखते हैं।
चमकदार नाम वही चारों तरफ
पर उनके चेहरे बाज़ार में
दाम लेकर बिकते हैं।
—————
एक सवाल उठाता है
दूसरा देता है जवाब।
बहसें बिक रही है
विज्ञापन के सहारे
चेहरे पहले से तय हैं,
जुबान से निकले
और कागज़ में लिखे शब्द भी
पहले से तय हैं,
निष्कर्ष कोई नहीं
पर बात हमेशा होती है लाजवाब
पर जड़ जैसे दिखते हैं,
कलम उनके हाथ में
पर दूसरे के शब्द लिखते हैं।
चमकदार नाम वही चारों तरफ
पर उनके चेहरे बाज़ार में
दाम लेकर बिकते हैं।
—————
एक सवाल उठाता है
दूसरा देता है जवाब।
बहसें बिक रही है
विज्ञापन के सहारे
चेहरे पहले से तय हैं,
जुबान से निकले
और कागज़ में लिखे शब्द भी
पहले से तय हैं,
निष्कर्ष कोई नहीं
पर बात हमेशा होती है लाजवाब
जिम्मेदारी वह सारे समाज की यू ही नहीं उठाते,
मिलता कमीशन, खरीदकर घर का सामान जुटाते।
बह रही दौलत की नदियां, उनके घर की ओर,
दरियादिल दिखने के लिये, वह कुछ बूंदें भी लुटाते।
न कहीं शिकायत होती, न करता कोई फरियाद
भाग्य का तोहफा समझ सभी अपने हिस्से उठाते।
लग चुकी है ज़ंग लोगों के सोचने के औजारों में
तयशुदा लड़ाई है, खड़े यूं ही हाथ में तलवार घुमाते।
महल बनाने के लिये
उन्होंने कई घर उजाड़ डाले,
पैसा उनका भगवान है
उसकी बंदगी करते हुए
कई बंदों के घर उन्होंने उजाड़ डाले,
खौफ उनके पैसे का है
उनके खरीदे हथियारबंदों ने
दया के मंदिर ही उखाड़ डाले।
फिर भी नहीं की
अक्लमंदों ने भगवान मानकर
उनकी बंदगी
तो उन्होंने फरिश्ते का भेष उतारकर
शैतान की तरह डराने के लिये
ज़माने के सामने
अपने बदन उघाड़ डाले।
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सूखाराम सोलंकी सीरवी
रविवार, 28 अगस्त 2011
सीरवी बन्दुओ
सीरवी बन्दुओ से विनती हे की
३०-०८-२०११ भादवि बिज हे उस दी
आप अपने कम काज पूरा बंद रखे
और उस दिन समाज सेवा में लगे
रहे यह दिन माँ आईजी का इतियास
इस दिन को हमेशा यद् रखा जाना
चाहिए और २९-०८-२०११ रात को
माँ आईजी के मंदिर(भडेर) में सत्संगत
हे सा आप माताजी के मंदिर (भडेर )
में जाकर भजन का लाभ लेवे
और माँ आईजी मंदिर (भडेर) कुछ
चढावा जरुर लेवे
और दान जरुर करिये
लेखक
सूखाराम सोलंकी सीरवी
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