सोमवार, 29 अगस्त 2011

चेतन हैं


पर जड़ जैसे दिखते हैं,

कलम उनके हाथ में

पर दूसरे के शब्द लिखते हैं।

चमकदार नाम वही चारों तरफ

पर उनके चेहरे बाज़ार में

दाम लेकर बिकते हैं।


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एक सवाल उठाता है

दूसरा देता है जवाब।

बहसें बिक रही है

विज्ञापन के सहारे

चेहरे पहले से तय हैं,

जुबान से निकले



और कागज़ में लिखे शब्द भी

पहले से तय हैं,

निष्कर्ष कोई नहीं

पर बात हमेशा होती है लाजवाब

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