सोमवार, 29 अगस्त 2011



महल बनाने के लिये

उन्होंने कई घर उजाड़ डाले,

पैसा उनका भगवान है

उसकी बंदगी करते हुए

कई बंदों के घर उन्होंने उजाड़ डाले,

खौफ उनके पैसे का है

उनके खरीदे हथियारबंदों ने

दया के मंदिर ही उखाड़ डाले।

फिर भी नहीं की



अक्लमंदों ने भगवान मानकर

उनकी बंदगी

तो उन्होंने फरिश्ते का भेष उतारकर

शैतान की तरह डराने के लिये

ज़माने के सामने

अपने बदन उघाड़ डाले।

------------

सूखाराम सोलंकी सीरवी

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें