कर लो सभी से प्यार जगत मे कोई नही पराया है….
एक ही माँ के हम सब बच्चे ,एक ही पिता हमारा है
फिर भी ना जाने किस मूर्खो ने लड़ना हमें सिखाया है…
तुझ मे ॐ मुझ में ॐ..
….हिंदु का बेटा हो चाहे मुसलमान का… जनमता है तो पहली ध्वनि “ॐ” ही बोलता है…(बापूजी ने नवजात शिशु का पहला ध्वनि “ॐ” होती ये स्वयम आवाज निकालकर
….हिंदु हो ,चाहे मुस्लमान हो चाहे , ईसाई हो ,बीमार पडता है कराहते हुये जो ध्वनि निकालता है वो भी “ओमकार का ॐ ध्वनी ” ही है..(बापूजी ने कराहने के ध्वनी निकालकर स्पष्ट किया)
……सिर्फ मनुष्य ही नही लेकिन कुत्ते का बच्चा भी ठंड लगती और माँ आस पास नही दिखती तो जो आवाज निकालता तो उसमे भी “ॐ” कि आवाज सुनायी देती है…मैंने नही सिखाया उनको..
…आमिर हो चाहे गरीब हो , विद्वान हो चाहे अनपढ़ हो , सब मे एक ही स्वाभाविक तत्व है..उस चैत्यन्य की सत्ता है…इस लिए…
-मुसलमानो के “अल्लाह हो अकबर “ मे भी वोही “ॐ” मिला हुआ है..
-सीखो के “सतनाम” मे भी वोही “ॐ” सुनायी देता है..
-शैव और शाक्तो के मंत्रों मे भी वोही ॐ सुनायी देता है…
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