सोमवार, 26 सितंबर 2011

उल्लुओं और चमगादड़ों की
नजर भी अब कहने लगी है
उलटी है, ये दुनिया सीधी कैसे हो
जंगल की इस सभा में
शेर चीते बहुत कम थे
... गधे सिर्फ मौजूद थे
कुत्तों ने भी बहुत सोचा
पर अपनी गली के सिवा
भौंकने का तजुर्बा न था
नीतिज्ञ थे ,देख एक बोटी
दुम हिलाने लगे
मोरों ने बांधे तो थे, पाँव में घुंघरू
इस जंगल में बारिश न हुई
जंगल के कानून में
जीत किसी वोट से न हुई
शाम की दावत में
बलि फिर किसी मेमने की हुई

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