सोमवार, 26 सितंबर 2011
जिस भारत में कभी दूध की नदियाँ बहती थी,जहाँ का पेय दूध,दही,मटठा,शिकंजी,नारियल पानी और फलों का रस था, उसी भारत में अब शीतल पेय की कम्पनियों की वजह से शुद्ध जल मिलना भी दुर्भर होता जा रहा है। यह रसायन पेय मानव शरीर के लिए कितना हानिकारक है इसका अहसास उपयोग करने वाले को तुरंत नहीं होता है। इन शीतल पेय की कंपनियों के अनुसार इनमें --फॉस्फोरिक एसिड ,एस्प्रेटम(मेथाइल इस्टर)एसबुल्झे पोटेशियम,सोडियम बांजोएट,आदि रसायन मिलाए जाते हैं। इनमें चटपटा तीखापन लाने के लिए फास्फ़ोरिक और साइट्रिक एसिड का प्रयोग किया जाता है----फासफ़ोरिक एसिड की ज़्यादा मात्रा हमारे शरीर में कैल्शियम फास्फ़ोरस के अनुपात को बिगड़ देती है। इस से हड़ियाँ कमजोर होती हैं ,जोड़ो मे दर्द जैसे ख़तरनाक रोग का ख़तरा रहता है एस्प्रेटम से कैंसर और ब्रेन हैमरेज का ख़तरा रहता है। विज्ञान और पर्यावरण केंद्र भी कोक और पेप्सी की 12 ब्रांड मे ज़हरीले कीटनाशक होने की रिपोर्ट दे चुका है.............निर्णय आपका जिंदगी आपकी ...........जागो भारत जागो
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