रविवार, 11 दिसंबर 2011

तुम हो फूल गुलाब के जैसी, खुश्बुदार पवन हो!
तुम मेरे जीवन की रौनक, खुशियों का उपवन हो!

पल पल मेरे साथ हो रहती, जीवन को उल्लास हो देती!
रेगिस्तानी तेज धूप में, पानी का एहसास हो देती!
तुम हो आकर्षक झरने सी, नदियों सा यौवन हो!
तुम मेरे जीवन की रौनक, खुशियों का उपवन हो....

तुम दिल की धड़कन में रहती, रक्त कणिका बनकर बहती!
तुम हो मेरी मार्ग प्रदर्शक, वाणी में सच बनकर रहती!
तुम हो सुन्दर धवला जैसी, तुम सच का दर्पण हो!
तुम मेरे जीवन की रौनक, खुशियों का उपवन हो....

तुम सपना बनकर हो रहती, पत्तों पे शबनम सी रहती!
तुम ही मेरी भूख प्यास में, थाली में भोजन सी रहती!
"देव" के जीवन की सम्रद्धि, काजल भरे नयन हो!
तुम मेरे जीवन की रौनक, खुशियों का उपवन हो....

तुम हो फूल गुलाब के जैसी, खुश्बुदार पवन हो!
तुम मेरे जीवन की रौनक, खुशियों का उपवन हो!
हम भारत के नौजबां, हालात हमी तो बदलेंगे,
उम्र से लम्बी स्याह काली, रात हमी तो बदलेंगे...........

गाँधी बहुत जरूरी हुए, हर काम को करने की खातिर,
इनके बिना म्रत्यु पत्र भी, मिलता नही समय आखिर,
सच को भी सामने लाने को, जेबें ढीली करने होगी,
जो उनके मेरे मन में है, वो बात हमी तो बदलेंगे.......
हम भारत के नौजबां, हालात हमी तो बदलेंगे..........

सज्जन हमे रास ना आते, गुंडों के तलुवे चाटें,
भूखे को दाना नही, ताकतवर को रबड़ी खिलाते,
"सच का मुंह काला और झूठे का बोलबाला है",
दुनिया ना जो समझे, वो जज्वात हमी तो बदलेंगे........
हम भारत के नौजबां, हालात हमी तो बदलेंगे..........

हर हाथ तोड़ वो डालेंगे, उनको भ्रम बड़ा भारी,
सबको जूते से मसल देंगे, सत्ता के व्यापारी,
देश को जेल बनाने की, निज मन जिनने ठानी है,
उनके भ्रम भरे सारे ख्यालात हमी तो बदलेंगे........
हम भारत के नौजबां, हालात हमी तो बदलेंगे..........

नेता जो संसद में जा, बन बैठे भगवान हमारे,
क़ानून को जो जूती समझे, जनता को बेचारे,
सात पीड़ियों की खातिर, जो देश बेचने को तैयार,
ऐसे गद्दारों की, हर बात हमी तो बदलेंगे........
हम भारत के नौजबां, हालात हमी तो बदलेंगे.....
दुनिया बहुत मतलबी है
एक दोस्त की तलाश में
कदम-कदम पर खाया है धोखा
गिर-गिर कर संभला हूं
कैसे करूं यकीन अब तुझ पर
अब तो खुद से ही लगता है डर
कही मैं भी तो मतलबी नहीं
सोचता हूं जब एकांत में
समझ आता है कुछ-कुछ
मैं भी हूं मतलबी
क्योंकि मतलबी दुनिया में
मैं कोई खुदा तो नहीं
आखिर हूं इंसान ही
इस दुनिया का एक अंग
फिर कैसे हो सकता हूं जुदा
दुनिया के मतलबी रंग से
बेकार में ही दोष देता हूं
सबसे बड़ा दोषी तो मैं ही हूं
जो ढूंढ़ता हूं दुनिया में
अपने मतलब का दोस्त
क्योंकि मैं मतलबी हूं
एटम बम बनाकर तुम किस्मत पर फूल गए !
65-71 और 99 के युद्धों को शायद तुम भूल गए !!

पाकिस्तान.., तू चिंता मत कर, इस बार तुम्हारे चेहरे का खोल बदल देंगे !
इतिहास की क्या हस्ती है, पूरा भूगोल तक बदल देंगे !!

रावलपिंडी से कराची तक सब कुछ भारत हो जायेगा !
सिंधु नदी के आर पार पूरा भारत हो जायेगा !!

धारा हर मोड़ बदल कर लाहौर से गुजरेगी गंगा !
इस्लामाबाद की धरती पर लहराएगा भारत का झंडा !!

फिर सदियों तक जिन्ना जैसा शैतान नहीं होगा !
कश्मीर तो होगा लेकिन पाकिस्तान नहीं होगा !!!

जय महाकाल....!!!